गंगा के बढ़ते जल स्तर के चलते 15 सितंबर तक नौकायन पर लगी रोक, 1800 से ज्यादा नाव और बजड़ों पर रोक

उत्तर प्रदेश के वाराणसी में गंगा के लगातार बढ़ते जलस्तर की वजह से सभी प्रकार के नाव, बोट का संचालन बुधवार को बंद कर दिया गया हैं। काशी में चेतावनी बिन्दू 70.26 है जबकि खतरे का निशान 71.262 मीटर पर बना हुआ है। बुधवार को वाटर लेबल 65.79 मीटर तक पहुंच गया है। इस बीच, जल पुलिस लगातार घाटों पर गश्त कर रही है। किसी भी पर्यटक और दर्शनार्थियों को नाविकों को नाव पर न बैठाने की हिदायत दी गई है।

जिलाधिकारी कौशल राज शर्मा ने 15 सितंबर तक रोक लग दी है। काशी में गंगा प्रतिदिन चार सेंटीमीटर से की रफ्तार से बढ़ रही है। बनारस में घाटों का आपसी संपर्क टूट गया है। विश्वप्रसिद्ध गंगा आरती का भी स्थान बदल गया है। हालात को देखते हुए जिलाधिकारी ने गगा में नौकायन पर रोक लगाने का आदेश जारी करने के साथ ही जल पुलिस और पीएसी को निगरानी के आदेश दिए हैं। एनडीआरएफ को भी सतर्क कर दिया गया है।

बनारस नौकायन सेवा समिति के अध्यक्ष शंभू साहनी ने बताया राजघाट से अस्सी घाट के बीच करीब 1800 से ऊपर नाव मोटर बोट चलती है।गंगा उस पार से जो लोग आते जाते थे,उनको अब दिक्कत होगा।साथ ही गंगा किनारे होने वाले धार्मिक आयोजनों पर भी प्रभाव पड़ेगा।50 हजार से ज्यादे लोग,नाविक,मछुआरा,गोताखोर,नाव पर फूल माला बेचने वाले प्रभावित होंगे।



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बनारस में गंगा के जलस्तर में लगातार वृद्धि हो रही है। नाविकों को चेतावनी दी गई है कि वो दर्शनार्थियों या पयर्टकों को लेकर पानी में न जाएं।


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