डिजिटल युद्ध के लिए तैयार है भारत, अगर पाकिस्तान ने हमला किया तो उसका सर्वर सिस्टम हैक और नष्ट होने में देर नहीं लगेगी

लखनऊ. डिफेंस एक्सपो में जहां दुनिया भर की रक्षा कंपनियों के हथियार सजे हुए हैं, वहीं भारत की जल, थल और वायु सेना की ताकत के साथ डिजिटल युद्ध की तैयारियों से भी दुनिया वाकिफ हो रही है। किसी देश से युद्ध होने पर भारत उसका सर्वर सिस्टम ध्वस्त कर सकता है। इतना ही नहीं, उसका सर्वर हैक करके सभी सूचनाएं और टेक्नोलॉजी को ट्रान्सफर भी कर सकता है। यह तैयारी भारत के अलावा चीन, इजराइल, रूस, अमेरिका जैसे कुछ देशों के पास ही है। पाकिस्तान के पास डिजिटल युद्ध की कोई तैयारी नहीं है। वह सर्वर सिस्टम के लिए पूरी तरह चीन पर निर्भर है।

जानिए क्या है डिजिटल युद्ध
डीआरडीओ के वैज्ञानिक जेवेश पुरोहित बताते हैं- डिजिटल युद्ध सिर्फ तकनीक पर आधारित होता हैं। इस युद्ध में एक देश दूसरे देश पर किसी न किसी तकनीक के माध्यम से हमला करता हैं। वह साइबर अटैक तकनीक हो सकती हैं, वह किसी सर्वर या सिस्टम को रोकने का युद्ध हो सकता हैं। दूसरे देश के सभी इंटरनेट सेवाओं को कई घंटे तक रोका जा सकता है। डीआरडीओ के वैज्ञानिक नितिन बताते हैं- डिजिटल युद्ध में पूरी लड़ाई इंटरनेट के जरिए होती है। इस युद्ध में किसी दुश्मन देश में बिना किसी इंसान के भेजे हमला किया जाता है। सेटलाइट सर्वर, इंटर्नल सर्वर और विशेष तरह से तैयार किया गया ऐसा हथियार, जो रिमोट कंट्रोल या ऑटोमैटिक तरीके से प्रयोग होता है।

इन देशों में हुए हैं डिजिटल युद्ध
साइबर से जुड़े एक्सपर्ट बताते हैं- यूएसए में सबसे ज्यादा साइबर अटैक होते हैं, अनुमान के अनुसार हर साल यूनाइटेड स्टेट ऑफ अमेरिका में साइबर अटैक होते हैं। इस वजह से वहां साइबर सिक्योरिटी कंपनियों की संख्या अधिक है। यह संख्या दुनियाभर की कंपनियों की संख्या के मुकाबले 58%हैं। इसके बाद दूसरे नम्बर पर डिजिटल युद्ध इजरायल में हुए हैं, तीसरे नम्बर पर रूस, कनाडा, यूनाइटेड किडम, मलेशिया, चीन, फ्रांस, स्वीडन, स्टोनियां में डिजिटल युद्ध है।

डिजिटल डिफेंस में भारत की स्थिति
भारत डिजिटल युद्ध से लड़ने के लिए बहुत ही शांत तरीके की प्रक्रिया कर रहा हैं। डिजिटल युद्ध में आने वाली समस्याओं से लड़ने के लिए नए तकनीकों की खोज और साइबर अटैक रोकने की प्रक्रिया पर ध्यान दे रहा हैं। डिफेंस एक्सपो के डीआरडीओ में मौजूद वैज्ञानिक का तर्क है- इसके लिए एक अलग तरह का डिफेंस साइबर एजेंसी हैं, जिसमे एक हजार से ज्यादा एक्सपर्ट हैं। इनको आर्मी, नेवी, एयरफोर्स में बांट दिया गया हैं। डीआरडीओ के वैज्ञानिकों का दावा है कि भारत हर तरह के डिजिटल हमले से निपटने के लिए तैयार है।

डिफेंस एक्सपो में 500 के तरह मॉडल
वैज्ञानिक नितिन का कहना हैं डीआरडीओ की कंबाइंड डिफेंस रिसर्ज डेवलमेंट ऑर्गेनाशन के करीब 500 तरह के सॉफ्टवेयर और टेक्नॉजिज डिजिटल मॉडल सजाए गए हैं। इसमें सभी तरह के पब्लिक और प्राइवेट सेक्टर के भी मॉडल लगाए गए हैं। उनका कहना यह एक्सविशन पूरी तरह के डिजिटल डिफेन्स पर केंद्रित हैं जिसमें किसी भी तरह के डिजिटल प्रॉब्लम को लेकर सलूशन बताया जा सकता हैं। डीआरडीओ ने पूरी टेक्निक का लाइव प्रदर्शनी किया। ये हैं प्रमुख मॉडल- एडवांस टोवेड आर्टिलरी गन सिस्टम (एटीएजीएस), मैन बेटले टैंग (एमबीटी), अर्जुन एमके आईए, व्हिल्ड आर्म्ड प्लेटफार्म (डब्लूएपी), काउंटर माइन फ्लैल,15 एम एडवांस कंपोजिट मॉड्यूलर ब्रिजिंग सिस्टम (एसीएमबीएस) मॉड्यूलर ब्रिज हैं।

पाकिस्तान में डिजिटल डिफेंस की स्थिति
डीआरडीओ के वैज्ञानिकों का दावा है- पाकिस्तान मौजूदा समय में चीन पर सबसे ज्यादा निर्भर हैं। चीन के बाद टर्की से साइबर मदद लेता है। पाकिस्तान के पास खुद की डिजिटल डिफेंस तकनीक अभी नहीं है। ऐसे में अगर पाकिस्तान कभी भारत से युद्ध के बारे में सोचता भी है तो हम डिजिटल हमलों से ही उसको पस्त करने में सक्षम हैं। इस युद्ध में भारत को जनहानि भी नहीं होगी।



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लखनऊ में आयोजित डिफेंस एक्सपो में सजी है डीआरडीओ की प्रदर्शनी।
यहां भारत की तैयारियों को लेकर कई मॉडल और डिजिटल प्रोजेक्ट सजे हैं।
डीआरडीओ के अफसर डिजिटल युद्ध के बारे में जानकारी जरूरी जानकारी दे रहे हैं।


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